सामाजिक समरसता की मिसाल: रविदास मंदिर में सिख समाज ने गुरुवाणी गाकर मनाई जयंती

Pushpraj Singh Thakur
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कवर्धा। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर कवर्धा में सामाजिक समरसता और भाईचारे का एक प्रेरक दृश्य देखने को मिला। अहिरवार समाज के आराध्य संत गुरु रविदास जी के सम्मान में सिख समाज के लोगों ने रविदास मंदिर पहुंचकर श्रद्धापूर्वक गुरुवाणी का गायन किया और संत के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।

रविदास मंदिर में आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में सिख समाज के श्रद्धालुओं ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी का पाठ एवं कीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह दृश्य केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और परस्पर सम्मान का सजीव उदाहरण बन गया।

उल्लेखनीय है कि सिख धर्म में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के आदेशानुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु का स्थान प्राप्त है। इसी गुरु ग्रंथ साहिब में संत रविदास जी की कई वाणियां संकलित हैं, जो सिख परंपरा में भी उतनी ही श्रद्धा के साथ गाई और मानी जाती हैं। यही कारण है कि सिख समाज हर वर्ष संत रविदास जयंती को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाता है।

इस अवसर पर सिख समाज से जसविंदर बग्गा, जोगेंद्र सिंह सलूजा, नरेंद्र सिंह सलूजा, इंदरजीत सिंह छाबड़ा, भजनजीत खुराना, भूपिंदर सिंह चावला, नरेंद्र सिंह बग्गा, खालसा सेवा दल के युवा तथा अहिरवार से शोकी अहिरवार, दल्ली चंद, योगेश चोरिया, सूरज कोरी, सूर्यकांत महोबिया, अरुण चौरीआ, नंदू राडेकर, दीपक लांझी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

यह आयोजन इस बात का संदेश देता है कि संतों की वाणी और शिक्षाएं समाज को जोड़ने का कार्य करती हैं, और जब विभिन्न समाज मिलकर ऐसे अवसरों को मनाते हैं, तो सामाजिक एकता और भी सुदृढ़ होती है।

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आप सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं एवं वर्तमान में India News के जिला ब्यूरोचीफ के रूप में काम कर रहे हैं। आप सॉफ्टवेयर डेवलपर एवं डिजाइनर भी हैं।

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