कवर्धा: RTE प्रवेश में बड़ा खेल! हैबिटेशन कोड बदलकर ग्रामीण स्कूलों को शहरी दिखाने का आरोप, शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल

कवर्धा में निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने की शिकायत, कलेक्टर से जांच की मांग, बर्खास्तगी और मान्यता रद्द करने की मांग - अभिभावकों में भारी आक्रोश

Pushpraj Singh Thakur
4 Min Read

कवर्धा। जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (RTE) के तहत निजी स्कूलों में हुए प्रवेश को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षा सत्र 2025-26 सहित पूर्व वर्षों की प्रवेश प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर चहेते निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

हैबिटेशन कोड में कथित हेरफेर का आरोप – शिकायत के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में संचालित निजी स्कूलों को आरटीई पोर्टल पर तकनीकी हेरफेर कर शहरी क्षेत्र का दर्शाया गया। आरोप है कि गलत हैबिटेशन कोड (एचबी 12049) दर्ज कर स्कूलों को रामनगर, कवर्धा के शहरी क्षेत्र से संबंधित दिखाया गया, जिससे पात्रता और चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई।

युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने शिकायत में कहा कि जिला मुख्यालय में संचालित गुरुकुल पब्लिक स्कूल महाराजपुर और अशोका पब्लिक स्कूल शिक्षक नगर के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं।

उनका आरोप है कि गुरुकुल पब्लिक स्कूल महाराजपुर ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होने के बावजूद पोर्टल पर शहरी क्षेत्र से संबद्ध दिखाया गया। वहीं अशोका पब्लिक स्कूल, जो पहले शिक्षक नगर में संचालित था और बाद में ग्राम मजगांव में स्थानांतरित हुआ, उसे भी उसी हैबिटेशन कोड के माध्यम से शहरी क्षेत्र का दर्शाया गया।Q

अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप – शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह सब तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और नोडल अधिकारियों की मिलीभगत से संभव हुआ। आरोप है कि 19 अगस्त 2025 को भी इस संबंध में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन उस समय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

अभिभावकों में आक्रोश – मामले के सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही निजी स्कूलों के साथ मिलकर गड़बड़ी करेंगे, तो गरीब और पात्र बच्चों को न्याय कैसे मिलेगा।

अभिभावकों ने पूरे जिले के आरटीई पोर्टल की मैपिंग का तकनीकी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई की मांग – जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि मामले में शामिल नोडल अधिकारियों और तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाए। साथ ही संबंधित निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने और उन पर भारी जुर्माना लगाने की भी मांग की गई है।

ज्ञापन सौंपते समय भुनेश्वर पटेल, मेहुल सत्यवंशी, नरेंद्र वर्मा, राजा झरिया, सुनील सेन और राहुल सोनवानी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

प्रशासन ने दिया जांच का आश्वासन – जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने का आश्वासन दिया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल आरटीई अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन होगा, बल्कि पात्र विद्यार्थियों के भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ भी साबित होगा।

अब देखना यह होगा कि प्रशासनिक जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

Share This Article
Follow:
आप सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं एवं वर्तमान में India News के जिला ब्यूरोचीफ के रूप में काम कर रहे हैं। आप सॉफ्टवेयर डेवलपर एवं डिजाइनर भी हैं।

You cannot copy content of this page