रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ने एक बार फिर गौरव हासिल किया है, जब दो सगी बहनों ने विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रचा। 6 साल की भव्या कोटडिया और 3 साल की भविशा कोटडिया ने अपने अभूतपूर्व कारनामों से न केवल रायपुर बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। अपनी छोटी उम्र के बावजूद, इन दोनों बहनों ने अद्वितीय स्मरणशक्ति का प्रदर्शन करते हुए वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।
3 साल की भविशा ने 141 सेकंड में बताए 100 देशों की राजधानियों के नाम
भविशा कोटडिया की उपलब्धि चौंकाने वाली है। महज 3 साल की उम्र में भविशा ने 26 फरवरी 2024 को मात्र 2 मिनट 21 सेकंड (कुल 141 सेकंड) में 100 देशों की राजधानियों के नाम सुनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह कारनामा उस समय और भी अधिक चौंकाने वाला था क्योंकि भविशा तब सिर्फ 2 साल, 11 महीने और 10 दिन की थी। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना न केवल उसकी स्मरणशक्ति की ताकत को दर्शाता है, बल्कि उसके माता-पिता और परिवार के सहयोग की भी सराहना करता है।

6 साल की भव्या ने 1 मिनट 35 सेकंड में सुनाए 50 आविष्कारों के नाम
भविशा की बड़ी बहन भव्या कोटडिया ने भी 28 फरवरी 2024 को एक और अद्वितीय रिकॉर्ड कायम किया। केवल 6 साल, 3 महीने और 5 दिन की उम्र में, भव्या ने 1 मिनट 35 सेकंड में 50 आविष्कारों और उनके आविष्कारकों के नाम सुनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि साबित करती है कि भव्या की स्मरणशक्ति और ज्ञान की गहराई उसकी उम्र के बच्चों से कहीं आगे है।

ऐसे बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
भविशा और भव्या की इस अद्वितीय उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता का समर्पण और मार्गदर्शन है। कोटडिया बहनों का रिकॉर्ड बनाने का सफर आसान नहीं था। दोनों ने लगातार अभ्यास और ध्यान के साथ कठिन जानकारियों को याद करने की कला में महारथ हासिल की। उनके माता-पिता ने अपनी बेटियों की स्मरणशक्ति को मजबूत बनाने के लिए नियमित अभ्यास और मानसिक विकास की दिशा में उन्हें प्रेरित किया। इनकी खासियत यह है कि वे न केवल जानकारियों को याद रखती हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत पुनः प्राप्त करने की क्षमता भी रखती हैं। यही अद्वितीय क्षमता उन्हें उनके साथियों से अलग करती है।
परिवार और समाज में गर्व का विषय
कोटडिया बहनों की इस अद्वितीय सफलता ने न केवल उनके परिवार को गर्व महसूस कराया है, बल्कि पूरे रायपुर और छत्तीसगढ़ को भी गौरवान्वित किया है। वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज यह नाम न केवल भविशा और भव्या के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।
भविशा और भव्या की आगे की राह
इन दोनों बहनों की इस अद्वितीय सफलता के बाद, भविष्य में उनकी और भी ऊंचाइयों तक पहुंचने की संभावनाएं हैं। उनके माता-पिता का कहना है कि वे अपनी बेटियों को आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहयोग और प्रोत्साहन देंगे। उनकी स्मरणशक्ति और ज्ञान की गहराई को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि भविशा और भव्या आने वाले समय में और भी बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं।
समाप्ति: रायपुर की इन बेटियों ने जिस प्रकार से कम उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाकर देश का मान बढ़ाया है, वह सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। भविशा और भव्या की यह उपलब्धि न केवल उनकी मेधा और परिश्रम का परिणाम है, बल्कि यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।